लंबे समय तक बर्खास्तगी का बनवास काट चुके शिक्षक दे रहे एक समाजसेवी को अपराधी होने का सर्टिफिकेट, आरोपी और अपराधी में फर्क भी भूले

औरंगाबाद: सोशल मीडिया पर इन दिनों सर्टिफिकेट लेने – देने की होड़ लगी है। चाहे वह स्वयं कैसा भी हो उसे उसकी फिक्र नहीं होती। चाहे किसी भ्रष्टाचार मामले में लंबे समय तक वह बर्खास्त क्यों न रहा हो लेकिन उसे खुद को सही वहीं अन्य को गलत कहने में कोई गुरेज नहीं होता है। चाहे उक्त मामलों में न्यायालय और भारतीय दंड विधान कुछ भी कहता रहे। जिले में इन दिनों एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जिसमें एक शिक्षक द्वारा एक समाजसेवी को लगातार अपराधी कहकर सोशल मीडिया पर संबोधित किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दाऊदनगर प्रखंड के अरई गांव निवासी शिक्षक रजनीश कुमार जिले के सबसे चर्चित समाजसेवी व पिछले विधानसभा चुनाव में लोजपा (रा.) से चुनाव लड़कर उप – विजेता रहे डॉ. प्रकाश चंद्रा को लगातार अपराधी कहकर संबोधित कर रहे हैं। जिसे तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है।

साईबर क्राइम एक्सपर्ट एवं कई कानूनी सलाहकारों के अनुसार आरोपी को दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है। इसे ‘दोषी सिद्ध होने तक निर्दोष’ या ‘निर्दोषता का अनुमान’ सिद्धांत कहते हैं। यह सिद्धांत, संविधान के अनुच्छेद 20(3) में भी शामिल है। इस सिद्धांत के तहत, आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक कि उसे सार्वजनिक सुनवाई में कानून के मुताबिक माननीय न्यायालय में दोषी साबित न कर दिया जाए।


गौरतलब हो कि समाजसेवी को अपराधी कहकर संबोधित करने वाले शिक्षक खुद भी अपनी सेवा से भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त रह चुके हैं। इधर, जब उक्त प्रकरण पर जिले के चर्चित समाजसेवी डॉ. प्रकाश चंद्रा से फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो न्यूज लिखे जाने तक उनसे बात नहीं हो पाई है।

शिक्षक का शुरू से रहा है दोहरा मापदंड : चिंटू

दाऊदनगर शहर के वार्ड संख्या चार के पार्षद सह नगर परिषद शशक्त स्थाई समिति के सदस्य चिंटू मिश्रा ने बताया कि उन्हें खुद ताज्जुब होता है कि एक शिक्षक ऐसी नासमझी भरी हरकत करते हैं। शिक्षक रजनीश कुमार द्वारा मारपीट से संबंधित एक प्राथमिकी डॉ. प्रकाश चंद्रा पर कराई गई है। जिस मामले से उनका दूर – दूर तक कोई नाता नहीं है। फिलहाल वो मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने आगे कहा कि बतौर राजनेता प्रकाश भैया कई असहाय एवं पीड़ित व्यक्ति से मिलते हैं और सामर्थ्य अनुसार उसकी मदत करते हैं। जिसमें उन्हें खुशी मिलती है। उन्होंने कहा कि भैया की अगर निंदा कर के कोई खुश हो रहा हो तो भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। बशर्ते उनपर लगाया गया आरोप न्याय संगत हो। बताया गया कि हैंड्स ऑफ प्रकाश चंद्रा के संरक्षक सह लोजपा (रा.) प्रदेश उपाध्यक्ष पर कुल तीन मामले दर्ज किए गए हैं। जिसमें दो मामलों में न्यायालय द्वारा उन्हें दोष मुक्त करार दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि आदरणीय प्रकाश भैया के बढ़ रहे कद को देखकर कुछ लोगों में बेचैनी है। परन्तु माननीय न्यायलय पर उन्हें पूरा- पूरा भरोसा है कि इस इकलौते बचे मामले में भी जिले के चर्चित समाजसेवी एकदम दोषमुक्त साबित होंगे। बात – चित के अंत में श्री मिश्रा ने मजाकिया तंज कसते हुए बताया कि शिक्षक का दोहरा मापदंड इस बात से समझा जा सकता है कि वे खुद किसी आरोप में बर्खास्त तक हो चुके थे। लेकिन उन्हें कमियां दूसरों में ढूंढनी है। वो सेवा बर्खास्त रहे तो वे हरिश्चंद्र बन गए। वहीं डॉ. प्रकाश चंद्रा पर सिर्फ आरोप हीं लगा है और वे उक्त शिक्षक की नजर में अपराधी हो गए।

मानहानि मामले में है सजा का प्रावधान

मानहानि एक ऐसा अपराध है, जिसने कई लोगों की जिंदगियां तबाह कर दी हैं। पहले इस तरह के अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 व 502 लागू की जाती थी। लेकिन BNS ने नए कानून के रुप में जब से IPC की जगह ली है। ऐसे मामलों को BNS की धारा 356 के तहत दर्ज किया जाने लगा है। आज के समय में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ झूठी अफवाहे फैलाना या झूठी खबरें फैलाना बहुत ही साधारण सी बात हो गई है। अब तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झूठी खबरें फैलाकर किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच दिया जाता है। इससे व्यक्ति का सामाजिक जीवन, करियर और मानसिक स्वास्थ्य भी बहुत बुरे तरीके से प्रभावित हो सकता है। ऐसे अपराधों को मानहानि कहा जाता है और भारत में यह दंडनीय होते हैं।

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